चार बातें

जीवन की यात्रा में कई वस्तुओं की आवशयकता है |

सबसे पहले तो शारीर को स्वस्थ रखना है |
बिना स्वस्थ शारीर के कोई प्रसन्न नहीं रह सकता | इस लिए हमें व्यायाम करना चाहिये |
जिससे हमारें अंग प्रत्यंग सुदृढ़ हो जायें| हमें सामूहिक खेल कूद में हिस्सा लेना चाहिए |
जिस से हम औरों के और अपने दल के हित के लिए काम करना सीखे|

दूसरा काम है विद्या अध्यन | विद्या अनेक प्रकार की है |सब विद्याओं का ज्ञान कोई एक व्यक्ति प्राप्त नहीं कर सकता |
जिस किसी भी विषय का अध्यन करना हो उसमे यथा साध्य परिश्रम करना चाहिए |
अपने विषये विशेष में जहाँ से भी हो , जिस किसी भी से हो , ज्ञान-लाभ करना चाहिए | जिस सुलभता से युवावस्थामें ज्ञान मस्तिष्क में प्रवेश करता है और यहीं चिरस्थायी होकर रहता है , वह आगे चल कर संभव नहीं|

तीसरा काम है अपने को समाजसेवा के योग्य बंनाना | सभी के साथ रहना , सभी के दुःख सुख में साथ रहना… आदि| इस सबकी योग्यता पाठ्यव्स्था में ही प्राप्प्त हो सकती है|

मनुष्य की अन्य जन्तुओं से विशेश्ता इस अंश में है कि उसको अपनी आत्मा का ज्ञान है | यह आत्मा अजर है, अमर है | शरीर के नाश होने पर भी इसका नाश नहीं होता | इस आत्मा से ही मनुष्यका ईश्वर से सम्बन्ध स्थापित होता है | ईश्वर की उपास्नसे चित को शान्ति मिलती है | नीच प्रवृति से मनुष्य बचता है | सन्मार्ग की और आकृष्ट होता है |

इन चार बातों का यदि हम सभी ध्यान रखें तो अपना और विशव का कल्याण संभव है |

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